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पंडवानी की स्वर सम्राज्ञी पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन,रायपुर एम्स में 70 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस 

राजकीय सम्मान के साथ पैतृक गांव गनियारी में अंतिम संस्कार; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समेत देशभर ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि।

The Chalta/छत्तीसगढ़, 5 जुलाई। छत्तीसगढ़ की विश्वविख्यात पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित लोक कलाकार डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के लगभग 3:15 बजे रायपुर एम्स में निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कला एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
डॉ. तीजन बाई का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव गनियारी (जिला दुर्ग) लाया गया, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि, कलाकार और उनके प्रशंसक शामिल हुए तथा नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।


प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की पंडवानी लोककला को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उनका निधन भारतीय संस्कृति और लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय प्रतिभा से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित किया। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।


पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान
24 अप्रैल 1956 को जन्मी डॉ. तीजन बाई ने परंपरागत रूप से पुरुषों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली कापालिक शैली की पंडवानी को अपनाकर उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। अपने प्रभावशाली गायन, अभिनय और मंच प्रस्तुति के दम पर उन्होंने भारत ही नहीं, दुनिया के अनेक देशों में पंडवानी की विशिष्ट पहचान स्थापित की
भारतीय लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण तथा देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था                                                                         डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोक संस्कृति के एक स्वर्णिम अध्याय का अवसान है। उनकी कला, व्यक्तित्व और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

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