सीमा धनकी को शोध्य क्षमता प्रमाण पत्र की प्रक्रिया की थी पूरी जानकारी, नायब तहसीलदार की लापरवाही से बढ़ा विवाद: सूत्र
पटवारी द्वारा सत्यापन और हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी, केवल नायब तहसीलदार के हस्ताक्षर शेष थे; मामले में दोनों पक्षों पर एफआईआर दर्ज

The Chalta/राजापुर/ मैनपाट/सीतापुर। शोध्य क्षमता प्रमाण पत्र (सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। विधायक रामकुमार टोप्पो और मैनपाट के उप तहसील राजापुर के नायब तहसीलदार के बीच हुए विवाद के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है।

सूत्रों के अनुसार, सीमा धनकी अपने पति के पेरोल आवेदन के लिए शोध्य क्षमता प्रमाण पत्र बनवाने तहसील कार्यालय पहुंची थीं। बताया जाता है कि उन्हें इस प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की पूरी जानकारी थी, क्योंकि वह पूर्व में भी इसी प्रकार का प्रमाण पत्र बनवाकर अपने पति को पेरोल पर रिहा करा चुकी हैं।

तहसील कार्यालय से जुड़े सूत्रों का दावा है कि आवेदन के लिए आवश्यक सभी दस्तावेज जमा कर दिए गए थे। संबंधित पटवारी द्वारा संपत्ति का सत्यापन कर हस्ताक्षर भी किए जा चुके थे तथा दस्तावेजों का नोटरीकरण भी पूर्ण था। सूत्रों के अनुसार फाइल में केवल नायब तहसीलदार के हस्ताक्षर शेष थे, जिसके बाद उसे जेल प्रशासन को अग्रेषित किया जाना था।

बताया जा रहा है कि हस्ताक्षर की औपचारिकता पूरी होने के बजाय नायब तहसीलदार और आवेदक पक्ष के बीच बहस की स्थिति बन गई, जिससे विवाद बढ़ता चला गया। सूत्रों का मानना है कि यदि नियमानुसार हस्ताक्षर कर फाइल आगे भेज दी जाती, तो स्थिति विवाद तक नहीं पहुंचती।

इधर क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि विधायक रामकुमार टोप्पो के विरोधियों द्वारा उनके परिवार को विवादों में घेरने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही जांच एजेंसियों ने इस संबंध में कोई निष्कर्ष प्रस्तुत किया है।

फिलहाल पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं तथा घटना के लिए जिम्मेदारी किस पक्ष की बनती है।



