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सीतापुर में महिला उत्पीड़न मामला: 8 आरोपी गिरफ्तार, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई

दो पीड़िताओं के बयान के बाद जांच तेज, पुनः मेडिकल परीक्षण के आधार पर पुलिस ने की सख्त कार्रवाई

The Chalta/थाना सीतापुर क्षेत्र में महिला उत्पीड़न के गंभीर मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 वयस्क आरोपियों एवं 4 विधि से संघर्षरत बालकों सहित कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामला 26 अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब प्रार्थिया की रिपोर्ट पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 150/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70(2) एवं पॉक्सो अधिनियम की धाराओं 4(2), 5(जी) व 6 के तहत मामला पंजीबद्ध किया।

घटना का विवरण:
पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि 24 अप्रैल 2026 को वह अपनी सहेलियों के साथ एक शादी समारोह में गई थी। वापस लौटते समय आरोपियों ने उसे जबरन मोटरसाइकिल में बैठाकर ले गए और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता उसी रात घर पहुंची और अगले दिन परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी।

विवेचना के दौरान पीड़िता के बयान 26 अप्रैल को महिला पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए, जिसमें उसने अपनी एक अन्य सहेली के साथ भी दुष्कर्म की बात बताई। दोनों पीड़िताओं का मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें पहली पीड़िता का परीक्षण 26 अप्रैल और दूसरी का 27 अप्रैल को हुआ।

पुनः मेडिकल परीक्षण और जांच में प्रगति:
28 अप्रैल को परिजनों एवं डीडीसी सदस्य रतनी नाग द्वारा मेडिकल रिपोर्ट पर असहमति जताने के बाद पुलिस ने उच्च अधिकारियों—आईजी सरगुजा और एसएसपी सरगुजा—के निर्देश पर 29 अप्रैल को दोनों पीड़िताओं का पुनः मेडिकल परीक्षण जिला अस्पताल अंबिकापुर में कराया। प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर 30 अप्रैल तक कुल 6 आरोपियों (3 वयस्क और 3 बालक) को गिरफ्तार किया गया, जबकि अन्य को भी हिरासत में लेकर विधिक कार्रवाई की गई।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम:

  1. आनंद बेक (27 वर्ष), निवासी जजगा सेटरापारा
  2. विकास उर्फ राहुल तिग्गा (24 वर्ष), निवासी जजगा खालपरा
  3. मनीष खलखो उर्फ आभीस, निवासी जजगा उपरपारा
    (एक अन्य आरोपी सहित सभी को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है)

वहीं, 4 विधि से संघर्षरत बालकों को बाल न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

जांच में अन्य पहलू भी सामने आए:
सूत्रों के अनुसार मामले में एक अन्य अपराध की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक घटनाक्रम में छेड़छाड़ और विवाद की संभावना भी जताई जा रही है, लेकिन बाद में दूसरे पीड़िता के बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया।

पुलिस की भूमिका:
पुलिस का कहना है कि प्रारंभ से ही मामले में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। पुनः मेडिकल परीक्षण के बाद जांच को और मजबूती मिली, जिससे आरोपियों की गिरफ्तारी संभव हो सकी। दबाव या मामले को दबाने जैसी कोई स्थिति नहीं रही।

इन पुलिसकर्मियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका:
थाना प्रभारी उप निरीक्षक अखिलेश सिंह, सहायक उप निरीक्षक शशिप्रभा दास, प्रधान आरक्षक अखिलेश्वर भगत, आरक्षक धनकेश्वर यादव, राकेश यादव, प्रमित भगत, निर्मल कुर्रे, बूढ़ा पैकरा एवं सेवक प्रसाद ने जांच और गिरफ्तारी में अहम योगदान दिया।

फिलहाल:
सीतापुर थाना प्रभारी अखिलेश सिंह:- मामले की विवेचना जारी है और पुलिस द्वारा साक्ष्य संकलन कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

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