28.1 करोड़ से अधिक लोगों की हुई जाँच, 20 लाख से ज्यादा लोगों को टीबी निवारक उपचार; जेओएसएच अभियान से युवाओं और समुदायों को जोड़ने पर जोर
2015 से 2024 के बीच भारत में टीबी के नए मामलों में 21% की कमी, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी से उन्मूलन अभियान को मिली गति

नई दिल्ली। भारत तपेदिक (टीबी) के उन्मूलन की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कर रहा है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों के प्रभावी उपयोग से देश में टीबी के खिलाफ लड़ाई को नई गति मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक क्षय रोग रिपोर्ट 2025 के अनुसार, वर्ष 2015 से 2024 के बीच भारत में टीबी के नए मामलों में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि वैश्विक स्तर पर यह गिरावट 12 प्रतिशत रही। इसी अवधि में भारत में टीबी से होने वाली मौतों में भी 28 प्रतिशत की कमी आई है।
टीबी जाँच और उपचार का दायरा बढ़ा
टीबी के शीघ्र निदान और प्रभावी उपचार को सुनिश्चित करने के लिए देशभर में व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उपलब्ध सरकारी आँकड़ों के अनुसार, भारत में टीबी उपचार का दायरा बढ़कर 92 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह 78 प्रतिशत है। जून 2026 तक टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 28.1 करोड़ से अधिक लोगों की जाँच की जा चुकी है। वहीं, 20 लाख से अधिक लोगों को टीबी निवारक उपचार दिया गया है और 5.7 लाख नए निक्षय मित्र अभियान से जुड़े हैं। इसके अतिरिक्त, 46,118 ग्राम पंचायतों को टीबी-मुक्त प्रमाणन प्रदान किया गया है।
जेओएसएच अभियान से युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा
टीबी उन्मूलन के प्रयासों को जन आंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से 13 अक्टूबर 2026 को देशव्यापी सोशल मीडिया अभियान चलाया गया। इसके तहत जेओएसएच (JOSH—Joint Squad for Health) अभियान के अंतर्गत 11 राज्यों के 55 जिलों में प्रायोगिक आधार पर टीमें सक्रिय की गईं।
इन टीमों में माई भारत के स्वयंसेवक, राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के कैडेट और नामित अधिकारी शामिल हैं। इनका उद्देश्य लोगों को टीबी के लक्षणों, समय पर जाँच, शीघ्र उपचार और दवाओं का पूरा कोर्स करने के महत्व के प्रति जागरूक करना है। साथ ही, टीबी से जुड़े सामाजिक भेदभाव और गलत धारणाओं को दूर करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
आधुनिक तकनीक से टीबी की पहचान में तेजी
टीबी उन्मूलन अभियान में आधुनिक तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। हैंडहेल्ड एक्स-रे उपकरणों के उपयोग से एक्स-रे जाँच में 34 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित जाँच तकनीकों और ‘खुशी’ नामक एआई चैटबॉट से युक्त टीबी मुक्त भारत ऐप के माध्यम से लोगों को जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की पहल की गई है।
दवा-प्रतिरोधी टीबी के मरीजों के लिए कम अवधि वाली बीपीएएलएम (BPaLM) उपचार पद्धति भी शुरू की गई है। इसमें बेडाक्विलीन, प्रीटोमैनिड, लाइनज़ोलिड और मोक्सीफ्लॉक्सासिन दवाओं का उपयोग किया जाता है। इस उपचार पद्धति से पात्र मरीजों के उपचार की अवधि लगभग छह महीने तक सीमित की जा सकती है। कार्यक्रम के अंतर्गत 15,000 से अधिक मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट और रिफैम्पिसिन-रेसिस्टेंट टीबी मरीजों का उपचार शुरू किया जा चुका है।
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान से मिल रहा सहयोग
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरुआत 9 सितंबर 2022 को की गई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य टीबी मरीजों को अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराना, सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से अभियान को मजबूत करना है।
इस अभियान के अंतर्गत निक्षय मित्र कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। निक्षय मित्र के रूप में व्यक्ति, सामाजिक संस्थाएँ, कंपनियाँ, गैर-सरकारी संगठन और सामुदायिक समूह टीबी मरीजों को पोषण, खाद्य सामग्री और भावनात्मक सहयोग प्रदान कर सकते हैं। इससे मरीजों को उपचार के दौरान आर्थिक और सामाजिक सहायता मिलती है तथा उपचार नियमित रूप से पूरा करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
निक्षय पोषण योजना से मरीजों को आर्थिक सहायता
वर्ष 2018 में शुरू की गई निक्षय पोषण योजना के माध्यम से टीबी मरीजों को उपचार के दौरान पोषण संबंधी जरूरतों के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अप्रैल 2018 से अब तक 1.38 करोड़ लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से 4,454.68 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।
इस योजना का उद्देश्य टीबी मरीजों को उपचार के दौरान पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने में सहायता करना है, ताकि उनकी सेहत में सुधार हो और उपचार के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
100-दिवसीय अभियान से उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 7 दिसंबर 2024 को 100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान शुरू किया था। प्रारंभिक चरण में इसे 33 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 347 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में लागू किया गया। अभियान के अंतर्गत कमजोर और उच्च जोखिम वाली आबादी की पहचान, सक्रिय जाँच और समय पर उपचार पर विशेष जोर दिया गया।
मार्च 2026 से शुरू हुए दूसरे चरण में 1.2 लाख उच्च जोखिम वाले गाँवों और वार्डों में 1.7 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए गए। इस अभियान में 32 लाख विद्यार्थियों और माई भारत के 1.9 लाख स्वयंसेवकों ने भी सक्रिय भागीदारी की।
टीबी के लक्षण दिखने पर तुरंत कराएँ जाँच
टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करने वाला संक्रामक रोग है, लेकिन यह शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खाँसी रहना, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना, भूख में कमी और लगातार कमजोरी महसूस होना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।
ऐसे लक्षण दिखाई देने पर लोगों को नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाँच करानी चाहिए। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी की जाँच और उपचार निःशुल्क उपलब्ध हैं। समय पर निदान और निर्धारित उपचार पूरा करने से बीमारी को नियंत्रित करने तथा संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है।
सामुदायिक सहयोग से साकार होगा टीबी-मुक्त भारत का सपना
भारत में टीबी के मामलों में कमी, उपचार सेवाओं का विस्तार, आधुनिक तकनीक का उपयोग और जनभागीदारी इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाते हैं। जेओएसएच अभियान के माध्यम से युवाओं, स्वास्थ्य संस्थानों और स्थानीय समुदायों को जोड़कर टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
टीबी उन्मूलन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। समय पर जाँच, नियमित उपचार, मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने के प्रयासों से ही टीबी-मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है। यह पहल स्वस्थ और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।



