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डिजिटल तकनीक, एकीकृत योजना और बेहतर समन्वय से देश में सड़क, रेल, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत बनाने की पहल

डिजिटल तकनीक, एकीकृत योजना और बेहतर समन्वय से देश में सड़क, रेल, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत बनाने की पहल

नई दिल्ली। भारत में बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने और विभिन्न परिवहन साधनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू की गई पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान ने पांच वर्षों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह पहल अब केवल बुनियादी ढांचे के मानचित्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक डिजिटल नियोजन व्यवस्था के रूप में विकसित हो चुकी है। इसके माध्यम से केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक साझा मंच पर लाकर परियोजनाओं की योजना बनाने, उनका मूल्यांकन करने और बेहतर समन्वय स्थापित करने में सहायता मिल रही है।

13 अक्टूबर 2021 को शुरू की गई इस योजना में वर्तमान में 58 केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों तथा सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना, लागत और समय की बचत करना तथा देश में संपर्क सुविधाओं का विस्तार करना है।

विकसित भारत के निर्माण में बुनियादी ढांचे की अहम भूमिका

भारत में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, जलमार्ग और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का तेजी से विकास हो रहा है। इन सभी क्षेत्रों में बेहतर तालमेल स्थापित करना आवश्यक है, ताकि परियोजनाओं के निर्माण में देरी कम हो और उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सके।

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विभिन्न विभागों के आंकड़ों को एकीकृत किया गया है। इससे योजनाकारों को बुनियादी ढांचे, भौगोलिक परिस्थितियों, आर्थिक क्षेत्रों और अन्य आवश्यक जानकारियों का एक साथ विश्लेषण करने में मदद मिलती है। इस व्यवस्था से परियोजनाओं के लिए अधिक सटीक और आंकड़ा आधारित निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

पीएम गतिशक्ति के छह प्रमुख सिद्धांत

पीएम गतिशक्ति को प्रभावी बनाने के लिए छह प्रमुख सिद्धांत निर्धारित किए गए हैं। इनमें एकीकृत विकास, बहु-माध्यमीय परिवहन व्यवस्था, अंतिम छोर तक संपर्क सुविधा, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी, आवश्यक मंजूरियों में कमी तथा पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम करना शामिल है।

इस योजना के तहत सड़क, रेलवे, बंदरगाह, जलमार्ग, हवाई अड्डे, सार्वजनिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे को विकास के सात प्रमुख इंजन माना गया है।

राष्ट्रीय मास्टर प्लान के माध्यम से भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्ग, ड्राई पोर्ट और उड़ान जैसी विभिन्न योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिल रही है।

23,493 से अधिक डेटा लेयर्स से मजबूत हुई डिजिटल योजना

पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म पर 12 अक्टूबर 2026 तक 23,493 से अधिक डेटा लेयर्स उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से 230 अनुमोदित डेटासेट तक पहुंच उपलब्ध है।

इन आंकड़ों की सहायता से परियोजनाओं के लिए उपयुक्त स्थलों का चयन, संपर्क सुविधाओं का मानचित्रण, परिवहन मार्गों का निर्धारण और विभिन्न नियमों के अनुपालन की जांच की जा सकती है। इससे परियोजनाओं की योजना बनाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो रही है।

एकीकृत परिवहन नियोजन के लिए आईटीएलए की पहल

पीएम गतिशक्ति के पूरक के रूप में एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (आईटीएलए) की स्थापना को मंजूरी दिए जाने की जानकारी भी लेख में दी गई है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्राधिकरण दीर्घकालिक परिवहन नियोजन, राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करने और विभिन्न परिवहन परियोजनाओं के समन्वय पर ध्यान केंद्रित करेगा। इसमें 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन और उनके क्रियान्वयन की निगरानी भी शामिल है।

इसके अतिरिक्त, फास्टैग, वाहन और जीएसटीएन ई-वे बिल जैसे स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों को एकीकृत कर राष्ट्रीय परिवहन डेटा रिपॉजिटरी विकसित करने की योजना है।

396 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मूल्यांकन

पीएम गतिशक्ति के अंतर्गत गठित नेटवर्क नियोजन समूह (एनपीजी) ने 11 अगस्त 2026 तक लगभग 18.66 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 396 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मूल्यांकन किया था।

इनमें से 256 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी थी, जबकि 198 परियोजनाएं क्रियान्वयन के चरण में थीं।

इस प्रक्रिया में अधिकार प्राप्त सचिवों का समूह (ईजीओएस), नेटवर्क नियोजन समूह (एनपीजी) और तकनीकी सहायता इकाई (टीएसयू) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये संस्थाएं परियोजनाओं के मूल्यांकन, विभागों के बीच समन्वय और एकीकृत नियोजन को मजबूत बनाने में सहायता करती हैं।

गतिशक्ति विश्वविद्यालय से तैयार हो रहे कुशल विशेषज्ञ

परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में गतिशक्ति विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। यह विश्वविद्यालय शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्रीय मास्टर प्लान तथा राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति को सहयोग प्रदान कर रहा है।

जुलाई 2026 तक विश्वविद्यालय ने पीएम गतिशक्ति के लिए तैयार पाठ्यक्रमों के माध्यम से 2.4 लाख से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया था। विश्वविद्यालय का उद्देश्य परिवहन नियोजन, लॉजिस्टिक्स प्रबंधन और आधुनिक बुनियादी ढांचा विकास के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करना है।

खगोलिक आंकड़ों से लेकर लॉजिस्टिक्स तक डिजिटल समन्वय

पीएम गतिशक्ति के अंतर्गत बुनियादी ढांचे, भौगोलिक विशेषताओं, जनसांख्यिकी और आर्थिक क्षेत्रों से संबंधित आंकड़ों को एक साझा मंच पर उपलब्ध कराया जाता है। इससे परियोजनाओं के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करने और विभिन्न परिवहन नेटवर्कों के बीच संपर्क की कमियों को दूर करने में सहायता मिलती है।

एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूएलआईपी) और लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (एलडीबी) भी इस व्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। यूएलआईपी विभिन्न सरकारी लॉजिस्टिक्स प्रणालियों के डिजिटल एकीकरण में मदद करता है, जबकि एलडीबी आयात-निर्यात कंटेनरों की आवाजाही पर नजर रखने की सुविधा प्रदान करता है।

जुलाई 2026 तक यूएलआईपी के माध्यम से 142 एपीआई की मदद से 12 केंद्रीय मंत्रालयों की 46 सरकारी प्रणालियों को एकीकृत किया गया था।

अक्टूबर 2025 में पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म को निजी क्षेत्र के लिए भी खोलने की पहल की गई, जिसके माध्यम से चयनित गैर-संवेदनशील आंकड़ों तक नियंत्रित पहुंच उपलब्ध कराई गई। इससे बुनियादी ढांचा नियोजन और निवेश संबंधी निर्णयों में सहायता मिलने की उम्मीद है।

पुणे-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे से संपर्क सुविधाओं को बढ़ावा

पीएम गतिशक्ति के तहत चल रही प्रमुख परियोजनाओं में पुणे-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे शामिल है। लगभग 699 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित एक्सप्रेसवे का उद्देश्य महाराष्ट्र और कर्नाटक के औद्योगिक एवं आर्थिक क्षेत्रों को बेहतर संपर्क सुविधा प्रदान करना है। इसे 2027-28 तक पूरा करने की उम्मीद जताई गई है।

परियोजना के माध्यम से 15 राष्ट्रीय राजमार्गों, 25 राज्य राजमार्गों और छह रेलवे स्टेशनों को जोड़ने की योजना है। लेख के अनुसार, पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म की मदद से मार्गरेखा में बदलाव कर वन भूमि के साथ ओवरलैप को 19 प्रतिशत तक कम किया गया।

परियोजना पूरी होने पर यात्रा के समय में सात से आठ घंटे तक की कमी आने और ईंधन की खपत तथा कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय बचत होने की उम्मीद है।

असम में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क से मिलेगा लाभ

असम के जोगीघोपा में ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सड़क, रेल और अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से माल की आवाजाही को सुगम बनाना है।

इसके साथ ही धुबरी और फूलबाड़ी के बीच ब्रह्मपुत्र नदी पर चार लेन का पुल बनाया जा रहा है। इसके निर्माण से दोनों स्थानों के बीच यात्रा की दूरी 205 किलोमीटर से घटकर लगभग 20 किलोमीटर होने और यात्रा का समय सात घंटे से घटकर करीब 30 मिनट होने की उम्मीद है।

इस परियोजना से पूर्वोत्तर क्षेत्र में परिवहन, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

हरित ऊर्जा गलियारे से नवीकरणीय ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा

लद्दाख से हरियाणा के कैथल तक प्रस्तावित हरित ऊर्जा गलियारा भी पीएम गतिशक्ति के अंतर्गत महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। इसमें लगभग 480 किलोमीटर लंबी उच्च वोल्टेज डायरेक्ट करंट (एचवीडीसी) पारेषण लाइन विकसित करने की योजना है।

इस परियोजना का उद्देश्य लद्दाख में उत्पादित नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ना और देश में स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति को मजबूत करना है। इसके लिए वित्त वर्ष 2029-30 तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

भविष्य के बुनियादी ढांचे की मजबूत नींव

पीएम गतिशक्ति के पांच वर्षों की यात्रा ने देश में बुनियादी ढांचा नियोजन के लिए एकीकृत और तकनीक आधारित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया है। साझा डिजिटल मंच, बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय, आंकड़ों का विश्लेषण और परियोजनाओं की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं बुनियादी ढांचा विकास को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायक हैं।

आने वाले समय में इस पहल का विस्तार विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों, जिलों और नए बुनियादी ढांचा क्षेत्रों तक होने से परिवहन तथा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को और मजबूत बनाने की संभावनाएं हैं। बेहतर संपर्क सुविधा, संसाधनों का प्रभावी उपयोग और परियोजनाओं के बीच समन्वय विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) पर आधारित शोध लेख।

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