राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि, 57 हजार से अधिक किसान जुड़े
25,605 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती, ₹2,024 लाख खर्च; नीति आयोग की रिपोर्ट में लागत घटी और उत्पादन बढ़ने की पुष्टि

The Chalta/रायपुर। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के तहत छत्तीसगढ़ ने प्राकृतिक एवं रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि वर्ष 2025–26 तक राज्य में 57,590 किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। इसके लिए 467 क्लस्टर विकसित किए गए हैं, जिनके माध्यम से 25,605.416 हेक्टेयर भूमि प्राकृतिक खेती के दायरे में लाई गई है। इस अवधि में राज्य में ₹2,024.29 लाख का व्यय किया गया है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिशन के तहत अब तक 18,893 क्लस्टरों में 20,92,657 किसानों को जोड़ा गया है, जबकि 10,32,116.452 हेक्टेयर क्षेत्र प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाया गया है। वर्ष 2025–26 तक इस योजना पर देशभर में ₹59,814.43 लाख खर्च किए जा चुके हैं।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए देशभर में 527 कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), 76 कृषि विश्वविद्यालय (AU) तथा 194 स्थानीय प्राकृतिक खेती संस्थान (LNFI) कार्यरत हैं। वहीं 18 सेंटर ऑफ नेचुरल फार्मिंग (CoNF) वैज्ञानिकों, अधिकारियों और किसान मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण देकर क्लस्टर स्तर तक तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।
प्राकृतिक खेती उत्पादों की गुणवत्ता और बाज़ार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पीजीएस-इंडिया नेचुरल (PGS-India Natural) प्रमाणन प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत देशभर में 22.39 लाख से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया है, जबकि 14.20 लाख से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रमाणपत्र मिल चुका है। प्रमाणित उत्पाद पारंपरिक बाजारों के साथ-साथ ओएनडीसी (ONDC) प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हैं।
मिशन के तहत किसानों को दो वर्षों तक अधिकतम एक एकड़ के लिए ₹4,000 प्रति एकड़ प्रतिवर्ष का आउटपुट आधारित प्रोत्साहन दिया जाता है। यह राशि जैविक इनपुट तैयार करने, पशुधन प्रबंधन और प्रशिक्षण गतिविधियों में उपयोग की जाती है।
नीति आयोग की स्वतंत्र मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, 91.2 प्रतिशत किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद फसल उत्पादन और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार महसूस किया, जबकि 90.1 प्रतिशत किसानों ने उत्पादन लागत में कमी आने की पुष्टि की है। यह रिपोर्ट प्राकृतिक खेती को किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में प्रभावी पहल बताती है।



