छत्तीसगढ़ में गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता दिलाएगी ‘विधि सारथी’ फेलोशिप
एचएनएलयू रायपुर की अनूठी पहल, 18 महीने तक चयनित वकीलों को मिलेगा ₹22 हजार मासिक मानदेय; पांच जिलों में 1,000 से अधिक लोगों तक न्याय पहुंचाने का लक्ष्य

The Chalta/रायपुर, 17 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में वंचित एवं जरूरतमंद लोगों को नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और युवा अधिवक्ताओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एचएनएलयू), रायपुर ने ‘विधि सारथी–जस्टिस कनेक्ट लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम’ के पहले बैच की शुरुआत की है। इस योजना के तहत चयनित अधिवक्ता जरूरतमंद लोगों के मुकदमों की नि:शुल्क पैरवी करेंगे। 18 महीने की इस फेलोशिप में प्रत्येक चयनित वकील को प्रतिमाह 22,000 रुपये का मानदेय दिया जाएगा।
पांच जिलों में लागू होगी योजना
इस कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ के पांच जिलों—बिलासपुर, रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग और बलौदाबाजार में लागू किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर लोगों तक कानूनी सहायता पहुंचाना तथा न्याय व्यवस्था में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम के माध्यम से निर्धारित अवधि में लगभग 1,000 लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
10 अधिवक्ताओं का हुआ चयन
फेलोशिप के पहले बैच में कुल 10 अधिवक्ताओं का चयन किया गया है। प्रत्येक जिले से दो-दो वकीलों को इस कार्यक्रम के लिए चुना गया है। चयन प्रक्रिया के दौरान लगभग 500 आवेदन प्राप्त हुए थे। इसके बाद पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, बार, बेंच और विधि शिक्षा जगत के सदस्यों की समिति ने चयन प्रक्रिया पूरी की।
इस फेलोशिप में पहली पीढ़ी के वकीलों को विशेष अवसर दिया गया है, ताकि वे अपने पेशेवर कौशल को विकसित करने के साथ समाज के जरूरतमंद वर्गों को न्याय दिलाने में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी ने किया मार्गदर्शन
चयनित अधिवक्ताओं के लिए 14 और 15 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी के मुख्य संबोधन से हुआ।
उन्होंने कानूनी सहायता को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां किसी भी व्यक्ति को न्याय पाने से वंचित नहीं करें। उन्होंने अधिवक्ताओं से संवेदनशीलता, समर्पण और जनसेवा की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया।
मुकदमेबाजी के व्यावहारिक पहलुओं की दी जानकारी
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी ने नि:शुल्क कानूनी सहायता, न्याय तक पहुंच, कानूनी प्रारूपण, अभिवचन और अदालत में पैरवी के व्यावहारिक पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने मामलों की प्रभावी तैयारी, कानूनी प्रक्रियाओं की समझ और मुवक्किलों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में एचएनएलयू के कुलपति एवं परियोजना निदेशक प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानंदन सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विधिक सेवा संस्थानों के प्रतिनिधियों और अन्य विशेषज्ञों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। सत्रों के दौरान पेशेवर नैतिकता, मुकदमेबाजी की चुनौतियों और जरूरतमंद वादकारियों के प्रभावी प्रतिनिधित्व पर चर्चा हुई।
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण का मिला सहयोग
इस पहल को छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण का संस्थागत सहयोग प्राप्त हुआ है। विश्वविद्यालय का मानना है कि विभिन्न कानूनी संस्थानों के समन्वय से जरूरतमंद लोगों को बेहतर कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। यह कार्यक्रम कानूनी शिक्षा, युवा अधिवक्ताओं के व्यावसायिक विकास और सामाजिक सेवा को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नवंबर में शुरू हो सकता है दूसरा बैच
‘विधि सारथी–जस्टिस कनेक्ट लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम’ के दूसरे बैच की शुरुआत नवंबर 2026 में होने की उम्मीद है। इसके माध्यम से राज्य में नि:शुल्क कानूनी सेवाओं का विस्तार करने और वंचित समुदायों तक न्याय की पहुंच मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
एचएनएलयू रायपुर की यह पहल जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के साथ युवा अधिवक्ताओं को सामाजिक दायित्व निभाने का अवसर प्रदान करेगी। इससे छत्तीसगढ़ में नि:शुल्क वकालत को प्रोत्साहन मिलने और न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाने की उम्मीद है।



