मूली पड़हा कूड़ुख भवन सीतापुर में उरांव मूली पड़हा समाज के नव मनोनीत पदाधिकारियों ने ली शपथ
तिलक राम बने बेल (अध्यक्ष), अनिल केहरी को देवान और अनिल निराला उरांव को मिली प्रवक्ता की जिम्मेदारी,महिला पदाधिकारियों ने भी ली शपथ, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने पर दिया जोर।।

The Chalta/सीतापुर/ मूली पड़हा कूड़ुख भवन, सीतापुर में रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को पददा पड़हा छत्तीसगढ़ एवं मूली पड़हा सीतापुर के नवनियुक्त पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से पहुंचे सामाजिक पदाधिकारियों की उपस्थिति में पदाधिकारियों ने शपथ ग्रहण किया। इस दौरान समाज की संस्कृति, परंपरा के संरक्षण और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राजी पड़हा भारत के बेल एडवोकेट बागी लकड़ा, देवान विनोद भगत, कहतो सुशील उरांव, उरबस परशुराम भगत, पश्चिम बंगाल से पददा पड़हा के बेल राजेश उरांव एवं देवान शिवचरण टोप्पो तथा बिहार से पददा पड़हा के लखन उरांव, उप देवान सुखचरण उरांव और पंच मोहन तिर्की उपस्थित रहे।
नवनियुक्त पदाधिकारियों में तिलक राम को बेल (अध्यक्ष), अनिल केहरी को देवान (सचिव), शोमन राम को उप देवान (उप सचिव), धरमू राम बघेल को रकम उरवस (कोषाध्यक्ष) और जयराम भगत को कहतो (कानूनी सलाहकार) की जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं, अनिल निराला उरांव को कोटवार (प्रवक्ता) तथा जगे राम भगत को करटहा बनाया गया।
इसके अलावा रामकेश्वर राम भगत, बादी राम, बैजनाथ राम, बसंत राम भगत और मनधिर राम को पंच के रूप में शामिल किया गया। बंदे राम बैरागी को सलाहकार-अध्यक्ष बनाया गया, जबकि मनसुख राम, नागेश्वर राम, पिटर भगत और दया राम को सलाहकार की जिम्मेदारी दी गई।
महिला पदाधिकारियों ने भी ली शपथ
समारोह में महिला पदाधिकारियों की भी सहभागिता रही। अध्यक्ष श्रीमती सरिता बघेल सहित रोशनी मिंज, केंदी लकड़ा, लक्ष्मीनिया खलखो, सलिता तिर्की, मग्नती उंजन, फूलकनिया एक्का, लालमुनी कुजूर, साधना टोप्पो, सुनीता एक्का, उर्मिला बेक, एलिन भगत, अनीता भगत, कविता तिर्की, पुष्पा भगत, उर्मिला भगत और सुनीता तिर्की सहित अन्य महिला पदाधिकारियों ने शपथ ग्रहण किया।

संस्कृति और परंपरा के संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारियों ने नवनियुक्त सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। वक्ताओं ने समाज की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और आने वाली पीढ़ियों तक सामाजिक मूल्यों एवं परंपराओं को पहुंचाने का आह्वान किया। समारोह को समाज की एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।




