एम्स रायपुर में कुष्ठ रोग और मायसीटोमा के निदान एवं उपचार पर CME कार्यक्रम आयोजित
छत्तीसगढ़ के 80 से अधिक चिकित्सकों ने लिया हिस्सा, रोगों की समय पर पहचान और दिव्यांगता प्रबंधन पर हुई चर्चा

The Chalta/Raipur/16 अक्टूबर 2026। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के त्वचा रोग विभाग द्वारा कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) और मायसीटोमा के निदान एवं उपचार को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘कुष्ठ रोग और मायसीटोमा: निदान एवं प्रबंधन के बहुआयामी दृष्टिकोण’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के 80 से अधिक चिकित्सकों ने भाग लिया।
यह कार्यक्रम इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट्स, वेनेरियोलॉजिस्ट्स एंड लेप्रोलॉजिस्ट्स (IADVL) अकादमी तथा IADVL छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के सहयोग से आयोजित किया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने किया। इस अवसर पर एम्स रायपुर के डीन (एकेडमिक्स) डॉ. एली मोहापात्रा, मैसूरु के जेएसएस मेडिकल कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रेणुगा पी.एस.एस., IADVL छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के अध्यक्ष डॉ. पीयूष अग्रवाल तथा आयोजन अध्यक्ष एवं एम्स रायपुर के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सत्यकी गांगुली उपस्थित रहे।
कुष्ठ रोग की पहचान और दिव्यांगता प्रबंधन पर विशेष जोर
कार्यक्रम के वैज्ञानिक सत्रों में कुष्ठ रोग एवं मायसीटोमा की पहचान, चिकित्सकीय जांच और उपचार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कुष्ठ रोग में नसों की कार्यक्षमता की जांच, रोग से होने वाली दिव्यांगता के प्रबंधन के लिए स्प्लिंट का चयन, जांच के लिए नमूने एकत्र करने की तकनीक तथा मायसीटोमा के ऊतक-विज्ञान आधारित निदान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी।
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में कुष्ठ रोग उपचार के इतिहास, राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) तथा कुष्ठ रोग नियंत्रण में निजी चिकित्सकों की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
वैज्ञानिक सत्रों में डॉ. नील प्रभा, डॉ. सरवाना सुक्रिया एस., डॉ. जयदीप नंदी, डॉ. अर्चना केचे, डॉ. राकेश कुमार गुप्ता, डॉ. डेविड हेनरी और डॉ. संदीप एस. जोगदंड ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए।
विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
डॉ. रेणुगा पी.एस.एस. ने कुष्ठ रोग और मायसीटोमा के प्रबंधन पर आयोजित पैनल चर्चा का संचालन किया। वहीं, डॉ. भव्या स्वर्णकार ने स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए प्रश्नोत्तरी आयोजित की। इन सत्रों में चिकित्सकों ने अपने अनुभव साझा किए और रोगों के निदान में आने वाली चुनौतियों तथा बेहतर उपचार के लिए विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं के बीच समन्वय की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया।
80 से अधिक चिकित्सकों की सहभागिता
छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आए 80 से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी ने कुष्ठ रोग और अन्य उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारियों के प्रति चिकित्सा जगत की सक्रियता को प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम का समन्वय आयोजन अध्यक्ष डॉ. सत्यकी गांगुली और आयोजन सचिव डॉ. नील प्रभा ने किया। इसमें IADVL छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के अध्यक्ष डॉ. पीयूष अग्रवाल तथा सचिव डॉ. राकेश पटेल का भी सहयोग रहा।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि नियमित चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सकों के बीच सहयोग और आधुनिक निदान पद्धतियों के उपयोग से कुष्ठ रोग एवं मायसीटोमा की समय पर पहचान, उचित उपचार और रोगियों के समग्र प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), रायपुर | 16 अक्टूबर 2026



