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बीजापुर में ‘खेत बचाव अभियान’ का शुभारंभ, प्राकृतिक कीट प्रबंधन पर जोर

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने खेतों का निरीक्षण कर किसानों को कीट-व्याधियों से बचाव के उपाय बताए, नीमास्त्र और दशपर्णी अर्क के उपयोग को किया प्रोत्साहित।

बीजापुर, 22 अक्टूबर 2026। जिले में फसलों को कीट-व्याधियों से बचाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, बीजापुर द्वारा गुरुवार को ‘खेत बचाव अभियान’ का शुभारंभ किया गया। रबी फसल सत्र के दौरान यह अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक संचालित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य मिट्टी की सेहत बनाए रखने, फसलों की सुरक्षा करने और प्राकृतिक कीट प्रबंधन को बढ़ावा देना है।

खेतों का निरीक्षण कर किसानों को दी गई सलाह
अभियान के तहत कृषि विज्ञान केंद्र, बीजापुर के वैज्ञानिक डॉ. शमशेर आलम एवं डॉ. राजकमल पटेल के नेतृत्व में विशेषज्ञ दल ने बीजापुर गांव के खेतों का सघन दौरा किया। इस दौरान धान सहित अन्य फसलों का निरीक्षण कर उनमें लगने वाले प्रमुख कीटों एवं रोगों की पहचान की गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को तना छेदक, भूरा माहू और ब्लास्ट रोग से बचाव के लिए आवश्यक उपाय बताए तथा समय रहते नियंत्रण के तरीके अपनाने की सलाह दी।

प्राकृतिक घोलों के उपयोग पर दिया जोर
फसलों में रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने किसानों को नीमास्त्र, दशपर्णी अर्क और जीवामृत जैसे प्राकृतिक घोलों के उपयोग के प्रति जागरूक किया। इसके साथ ही समन्वित कीट प्रबंधन (आईपीएम) के अंतर्गत खेतों में प्रकाश प्रपंच और फेरोमोन प्रपंच लगाने का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया। इन उपायों का उद्देश्य कीटों की निगरानी और उनके प्रभावी नियंत्रण को बढ़ावा देना है।

मिट्टी की सेहत और उत्पादन लागत कम करने पर फोकस
डॉ. शमशेर आलम और डॉ. राजकमल पटेल ने किसानों को सलाह दी कि मौसम में होने वाले बदलावों को देखते हुए वे नियमित रूप से अपनी फसलों की निगरानी करें। कीट या रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं। वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक एवं समन्वित कीट प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसल उत्पादन को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।

‘स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान, समृद्ध भारत’ तथा ‘मिट्टी बचाओ, खेती बचाओ, किसान बचाओ’ की अवधारणा पर आधारित यह अभियान किसानों को जागरूक करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक पहल है।

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