ममता का सौदा! गोद दिलाने के नाम पर मासूम की कथित खरीद-फरोख्त, माता-पिता दर-दर भटकने को मजबूर
मेहनतकश दंपती का आरोप—गरीबी का फायदा उठाकर रची गई साजिश, बच्चे से मिलने तक नहीं दिया जा रहा

The Chalta /सरगुजा जिले से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। गोद दिलाने के नाम पर एक मासूम बच्चे को उसके माता-पिता से अलग कर देने और कथित तौर पर पैसों के लेन-देन के जरिए उसे अन्यत्र सौंप देने का गंभीर आरोप लगाया गया है। पीड़ित दंपती का कहना है कि उनकी मजबूरी और गरीबी का फायदा उठाकर यह साजिश रची गई, जिसका खामियाजा आज उनका नन्हा बच्चा भुगत रहा है।

वार्ड क्रमांक 08, जामढोढ़ी, मैनपाट निवासी विजय कुमार और उनकी पत्नी बसंती मरावी ने पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि उनके पड़ोसी दालूर अगरिया ने भरोसा दिलाया कि उनका बच्चा सुरक्षित हाथों में रहेगा और वे चाहें तो उससे मिल सकेंगे। इसी भरोसे में आकर उन्होंने अपने सबसे छोटे बच्चे को अस्थायी रूप से सौंप दिया।

शिकायत में बताया गया है कि बाद में उन्हें जानकारी मिली कि कोलकाता निवासी गौतम कुमार अग्रवाल और उनकी पत्नी श्वेता दीवान द्वारा कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों और नोटरी सहमति पत्र के आधार पर गोदनामा तैयार कराया गया। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में स्टाम्प वेंडर के माध्यम से कागजी औपचारिकताएं पूरी कराई गईं और दबाव बनाकर हस्ताक्षर भी कराए गए।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि गोदनामा के एवज में एक लाख रुपये का लेन-देन हुआ, जिससे यह मामला केवल गोद लेने का नहीं बल्कि कथित अपहरण और तस्करी की आशंका तक पहुंच जाता है। पीड़ित माता-पिता का कहना है कि अब उन्हें अपने ही बच्चे से मिलने नहीं दिया जा रहा, जबकि उन्हें पहले ऐसा आश्वासन दिया गया था।

पीड़ित दंपती ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि मामले की निष्पक्ष और तत्काल जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ कड़ी आपराधिक कार्रवाई की जाए और उनके मासूम बच्चे को उन्हें वापस सौंपा जाए। उन्होंने कहा कि कानून समाज में इसलिए है ताकि गरीब और असहाय लोगों की आवाज दबाई न जा सके।
यह मामला न केवल प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर शिकायत पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करते हैं और एक परिवार को उसका उजड़ा हुआ आंचल वापस मिल पाता है या नहीं।



