“छत्तीसगढ़ ल छांव करं बर, मैं छानी बन जातेंव!” माटी के सपूत कवि केदार सिंह परिहार अब नइ रहिन…
परिहार जी के योगदान ल छत्तीसगढ़ कब्भू नइ भुलाही। ओ मन म, ओ भाखा म, अउ ओ संस्कृति म हमेशा जियत रहंय..

द चलता समाचार / 31 अगस्त 2025/रायपुर/छत्तीसगढ़ी भाखा, माटी के गंध, आघू बढ़त संस्कृति ल अपन कविता म गढ़े वाले प्रसिद्ध कवि श्री केदार सिंह परिहार अब हमन बीच नइ रहिन। सोमवार के बिहान उंकर निधन होगे। साहित्य के दुनिया म ए खबर सुन के हर कोनो भावुक हो गे।
परिहार जी के लिखे पंक्ति –
“छत्तीसगढ़ ल छांव करं बर, मैं छानी बन जातेंव!!”
आज घलो हर छत्तीसगढ़िया मन के मन म गूंजत हवय।
गृहमंत्री विजय शर्मा जी घलो परिहार जी के निधन ल एक गहिर दुख मानत कहिन “उंकर लेखनी म माटी के गंध रहिस, मनखे के पीरा रहिस, संस्कृति के आत्मा रहिस। आज छत्तीसगढ़ अपन एक सच्चा सपूत ल खो दे हवय। भगवान ओखर आत्मा ल शांति देवय अउ परिवार ल दुख सहाय बर शक्ति देवय।”
साहित्यिक मंच, लोक कलाकार, अउ चाहने वाले लोगन मन उंकर अंतिम यात्रा म शामिल होए के तैयारी म हें।
परिहार जी के योगदान ल छत्तीसगढ़ कब्भू नइ भुलाही। ओ मन म, ओ भाखा म, अउ ओ संस्कृति म हमेशा जियत रहंय।