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सरगुजा ओलंपिक बना अव्यवस्था का नमूना: पेटला हाई स्कूल मैदान में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव

3 लाख के बजट के बावजूद न ओलंपिक लायक मैदान, न प्रचार ,खिलाड़ी सोशल मीडिया पर उजागर कर रहे सच्चाई, हजारों रजिस्ट्रेशन के अनुसार खिलाड़ी भी नहीं दिखे मैदान में...

The Chalta/सरगुजा ओलंपिक के विकासखंड स्तरीय आयोजन को लेकर ज़मीनी हकीकत सरकारी दावों के बिल्कुल उलट सामने आई है। हाई स्कूल ग्राउंड पेटला में चल रहे इस आयोजन में न तो ओलंपिक के अनुरूप मैदान उपलब्ध है और न ही खिलाड़ियों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं। मजबूरी में खिलाड़ी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा सार्वजनिक कर रहे हैं।


आयोजन को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार का लगभग पूर्ण अभाव देखा गया। जिस तरह राजनीतिक कार्यक्रमों, प्रशासनिक शिविरों या सामान्य क्रिकेट-फुटबॉल मैचों में प्रशासनिक सक्रियता दिखाई देती है, वैसी गंभीरता सरगुजा ओलंपिक के आयोजन में नज़र नहीं आई। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या खेल आयोजन प्रशासन की प्राथमिकता में है भी या नहीं।


सबसे गंभीर लापरवाही मैदान चयन और तैयारी को लेकर सामने आई है। जहां बेहतर और समतल मैदान उपलब्ध हैं, वहां आयोजन नहीं कराया गया, जबकि पेटला हाई स्कूल मैदान को बिना आवश्यक तैयारी के ही प्रतियोगिता स्थल बना दिया गया। खिलाड़ियों के अनुसार असमान और अनुपयुक्त मैदान पर खेलना चोट के जोखिम को बढ़ा रहा है।
भोजन व्यवस्था को लेकर खिलाड़ी भले ही चुप हैं, लेकिन हालात खुद कहानी बयां करते हैं। दाल-भात, मटर-आलू की सब्ज़ी, टमाटर चटनी और चिप्स जैसे सामान्य भोजन से खिलाड़ी किसी तरह समझौता कर रहे हैं, पर खराब मैदान से समझौता उनके लिए संभव नहीं है।


खिलाड़ियों ने बताया कि दो-दिवसीय जनपद पंचायत स्तरीय सरगुजा ओलंपिक आयोजन के लिए 3 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके बावजूद मैदान, प्रचार और व्यवस्थाओं की बदहाली ने बजट उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


इस पूरे आयोजन के दौरान जनपद पंचायत के सीईओ और जनपद सदस्य ग्रामीणों के साथ समय बिताते नज़र आए, जबकि खेल मैदान पर अव्यवस्थाएं जस की तस बनी रहीं।

राजनीतिक स्तर पर भी स्थिति सवालों के घेरे में है। सीतापुर विधानसभा के विधायक रामकुमार टोप्पो अपने ही विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनपद पंचायत स्तरीय सरगुजा ओलंपिक में उपस्थित नहीं हुए तथा जनपद अध्यक्ष उपाध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुपस्थिति को लेकर स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज है कि जब जनप्रतिनिधि ही खेल आयोजनों से दूरी बनाएंगे, तो खिलाड़ियों का मनोबल कैसे बढ़ेगा।

खिलाड़ी दीपक ने रजिस्ट्रेशन के अनुसार खिलाड़ी मैदान पर नहीं देखा गया आगे कहा सरगुजा ओलंपिक को खेल प्रतिभाओं के मंच के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन पेटला से सामने आई तस्वीरें बता रही हैं कि यह आयोजन फिलहाल व्यवस्थागत उदासीनता और औपचारिकता का शिकार होता दिख रहा है।

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