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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही – कमलेश्वरपुर अस्पताल का मामला

फार्मासिस्ट की गैरमौजूदगी में कोई अनियंत्रित व्यक्ति दवाइयाँ दे रहा है, तो यह न सिर्फ लापरवाही है, बल्कि चिकित्सा सेवाओं का विश्वास भी टूट सकता है....

The chalta/सरगुजा के मैनपाट क्षेत्र का कमलेश्वरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हाल ही में एक गंभीर लापरवाही का शिकार हुआ है। इस अस्पताल में फार्मासिस्ट की गैरमौजूदगी में चपरासी द्वारा मरीजों को दवाइयाँ देना न केवल एक गंभीर गलती है, बल्कि यह मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करने जैसा है। स्थानीय नागरिक रमजान खान का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की यह लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है, और यह एक ऐसी समस्या है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

स्वास्थ्य सेवाएँ किसी भी समाज की नींव होती हैं, और इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। जब अस्पताल में दवाइयाँ देने के लिए प्रशिक्षित और योग्य कर्मचारी ही नहीं होते, तो इस तरह के असंवेदनशील व्यवहार से मरीजों की जान को खतरा होता है। खासकर, जब इलाज और दवाइयाँ सही समय पर और सही तरीके से नहीं दी जातीं, तो यह किसी भी मरीज के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

कमलेश्वरपुर अस्पताल में चपरासी द्वारा दवाइयाँ दिए जाने की घटना केवल एक उदाहरण है, पर यह इस बात का संकेत भी है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में गहरी खामियाँ हैं। यदि फार्मासिस्ट की गैरमौजूदगी में कोई अनियंत्रित व्यक्ति दवाइयाँ दे रहा है, तो यह न सिर्फ लापरवाही है, बल्कि चिकित्सा सेवाओं का विश्वास भी टूट सकता है।

हम सभी जानते हैं कि सही दवाई और सही इलाज की अहमियत कितनी होती है, और इस पर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। यह समय की आवश्यकता है कि स्वास्थ्य विभाग इस तरह की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई करे और सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसे लापरवाह व्यवहार को रोका जाए।

सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इस घटना से सीख लेकर, सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में योग्य और प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके अलावा, अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है। किसी भी नागरिक को अपनी जान से हाथ नहीं गंवाना चाहिए, और यह सिर्फ तभी संभव है जब स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सर्वोत्तम हो।

यह मामला इस बात का भी संकेत है कि स्वास्थ्य विभाग को जनता की आवाज को सुनने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की आवश्यकता है। मीडिया और नागरिक समाज की सक्रियता से ही इस मामले को उजागर किया गया है, और अब यह जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की बनती है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर इसे सुलझाने के लिए तत्काल कदम उठाए।

कुल मिलाकर, यह एक स्पष्ट उदाहरण है कि जब स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं निभाई जाती, तो इससे मरीजों की जान को खतरा होता है। स्वास्थ्य विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाकर इस प्रकार की घटनाओं को रोकने की आवश्यकता है, ताकि किसी और को इस तरह की लापरवाही का शिकार न होना पड़े।

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