आधार केंद्रों को लेकर कलेक्टर के सख्त निर्देश, सीतापुर में नए भवन निर्माण पर उठे सवाल:नियमों की व्याख्या पर प्रशासन घिरा
शासकीय परिसरों में संचालन का आदेश, लेकिन तहसील परिसर के बाहर निर्माण कार्य शुरू; नियमों की व्याख्या पर प्रशासन घिरा

सरगुजा/सीतापुर।
जिला कलेक्टर सरगुजा द्वारा आधार सुविधा केंद्रों के संचालन को लेकर जारी किए गए निर्देशों के बाद प्रशासनिक अमले में हलचल है। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जिले में संचालित सभी आधार सुविधा केंद्र केवल शासकीय परिसरों में ही संचालित किए जाएं। निजी परिसरों में चल रहे केंद्रों को तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर द्वारा जारी डिजिटल हस्ताक्षरित पत्र में आयुक्त नगर पालिक निगम अंबिकापुर, सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत सहित संबंधित अधिकारियों को आदेश के कड़ाई से पालन के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि नियमों के विरुद्ध संचालित केंद्रों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन का यह निर्णय आधार सेवाओं में पारदर्शिता और सुव्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि, सीतापुर में इस आदेश की आड़ में नए निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि तहसीलदार रूपाली मेश्राम द्वारा आधार कार्ड संचालन के नाम पर जमीन उपलब्ध कराते हुए नया निर्माण कार्य शुरू कराया गया है। जब स्थानीय मीडिया टीम ने इस विषय में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो कलेक्टर के आदेश का हवाला दिया गया।
सूत्रों का कहना है कि कलेक्टर के आदेश में केवल शासकीय परिसरों में संचालन की बात कही गई है, नए भवन निर्माण का कोई उल्लेख नहीं है। वहीं सीतापुर तहसील कार्यालय पुराना और सीमित स्थान वाला बताया जा रहा है। परिसर में पृथक कक्ष उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में आंगन क्षेत्र में अस्थायी सुरक्षित केबिन बनाने का विकल्प संभव बताया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जिस स्थान पर निर्माण कार्य किया जा रहा है, उसके समीप पहले से एक ‘दाल-भात केंद्र’ के नाम पर कब्जा बना हुआ है, जो लंबे समय से बंद पड़ा है। ऐसे में नए निर्माण को लेकर अतिक्रमण की आशंका जताई जा रही है।
मामले ने प्रशासनिक हलकों में चर्चा को और तेज कर दिया है। यह सवाल उठ रहा है कि क्या आदेश की मंशा के अनुरूप कार्य हो रहा है या नियमों की अलग व्याख्या की जा रही है। अब देखना यह है कि उच्च प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है और यदि कहीं नियमों की अनदेखी हुई है तो क्या जांच अथवा कार्रवाई की जाएगी।



